Thursday, September 19, 2013

औरत के पैर

मृत आस्थाएं, आशाएं
दिशाएं, भाषाएँ
माताएं, इच्छाएं
भ्रम और कल्पनाएँ
सांसें और मूर्छाएं
खिलके खुले
खुलकर मुरझाएं,
खिली मौत, खुली मौत
मौत का मुरझाना
जनाजेसी जनाना
न जाओ सैयां, ना ना
हो सके तो मुझे बुलाना
आना और ले जाना
तुम बिन क्या पाना
वो तुम, जिसने सीना ताना
खून-पसीना; पीकर मारा, मारा ताना
तन पे ताना, मन से माना
मैं जनाना, महज ना ना.

सिर में मचा उधम
सिरों को दे थम
सरसराहट का खौफ
आहट का खौफ
आह का खौफ
आप का खौफ
अपना खौफ
पनाह से बचों
क्योंकि पनाह को
‘ना’ नापसंद हैं.

भागो, रुको, रुको, भागो
दायें-बाएं, बाएं-दायें
देखो, मुडों, मुडके देखो
देखो, डरों, ना मुडों, ना देखो
भागो, मत रुको, भागते रहो.
साडी पे पैर, पैर में साडी
साडी उठाओ, पैर चलाओ
पैर चलाओ, पैर दिखाओ
पैर दिखाओ, डर जाओ
डर जाओ, तो भागो
भागो, तो मुडों
मुडों, तो गिरों
गिरों, तो भी पैर चलाओ.

१.        यह पैर चलने चाहिए
इनके बीचो-बीच हवा बहनी चाहिए
कुछ सरसराहट होनी चाहिए
कुछ आस्थाएं उमडनी चाहिए
कुछ सासें जलनी चाहिए
कुछ चीखें सुननी चाहिए
अच्छा लगता हैं
मुझे बस अच्छा लगाना हैं.


-------या फिर-----------

२.       यह पैर चलने चाहिए
यह चलने के लिए हैं
यह कुछ पीछे छोड़ आते हैं
पीछे छोडना इनका धर्म हैं
पीछे छोडना हमेशा अच्छा नहीं होता
आगे बढ़ना पर हमेशा अच्छा होता हैं
मुझे अच्छा होना हैं.